Horror Story In Hindi - सच्ची घटना पर आधारित हॉरर स्टोरी


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मसूरी की डरावनी रात -  सच्ची डरावनी कहानी


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यह कहानी आरव की है और है और उसकी जिंदगी में घटी एक सच्ची घटना पर आधारित है।
दिन के समय डर शायद ही किसी को लगता होगा मगर वीरान जंगल में सच्चाई कुछ और होती है। डर का एहसास हमें अकेले में होता है। बात देहरादून की है आरव अपने दोस्तों के साथ जॉर्ज एवरेस्ट घूमने गया था, वे अक्सर कहीं बाहर घूमने जाया करते थे , और उस दिन अमित का जन्मदिन था इसलिए आरव और उसके दोस्त अमित का जन्मदिन मनाने के लिए मसूरी गए थे । 
आते हुए शाम बहुत ज्यादा हो चुकी थी मगर कोई आने को तैयार न था सभी नशे में थे सभी ने पी रखी थी, आरव ने केवल बियर पी थी । जब वह वहां से देहरादून के लिए निकले तो रात के 10:00 बज गए थे और आरव की बाइक पर कोई नहीं बैठा था वह अकेला था ।
जब दोस्त निकले वह पेशाब करने में लग गया क्योंकि उसने ज्यादा बीयर पी रखी थी, दोस्त एक मोड़ आगे निकल गए  थे, वे हल्ला कर रहे थे और स्पीकर पर जोरो से गाने बजा रहे थे । किसी को होश तो था नहीं सारे नशे में थे, और आरव जब चलने लगा तो उसे लगा उसके पीछे कोई है उसने पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई भी नहीं था, उसने जल्दी से अपनी बाइक स्टार्ट की और तेजी से चल पड़ा वह दो मोड़ आगे ही पहुंचा था कि उस वीरान से रास्ते में उसे दो महिलाएं लाल साड़ी में दिखी उन्होंने आरव से लिफ्ट मांगी आरव ने पहले तो सोचा पर मगर फिर बाइक रोक दी, क्योंकि सड़क वीरान थी उसने सोचा मदद कर देता हूं । आरव ने उनसे कहा कि आप बैठ जाइए ,  लेकिन जब वे बैठे तो उसे कुछ महसूस नहीं हुआ, उसे पता नहीं चला उसने अपना हेलमेट उतारा और पीछे देख कर कर बोला अरे जल्दी बैठो मुझे लेट हो रहा है उनमें से एक औरत ने कहा बाबूजी कि बोलछेस (बाबू जी क्या बोल रहे क्या बोल रहे हो ) वह औरत बंगाली थी आरव ने पीछे मुड़कर देखा तो दोनों बैठे हुए थे लेकिन आरव को बाइक पर कुछ वजन महसूस ही नहीं हो रहा था, उसे अजीब सा लगा वह घबरा गया था ।
और उसे डर लगने लगा लेकिन उसने शीशे में नहीं देखा क्योंकि वह इतना घबरा गया था कि उसने बाइक की स्टार्ट की स्टार्ट स्टार्ट की और तेजी से चल पड़ा उसे अजीब सा डर अंदर से उसकी जान जा रही थी दिल की धड़कन सहम सी गई थी, डर के मारे उसके दिल में एक दहशत पैदा हो गई थी, वह जैसे ही कुछ कुछ किलोमीटर आगे गया ही था कि एक वीरान ढलान पर उनमें से एक ने कहा बाबूजी एखाने थामो (बाबूजी यहीं पर रोक दो) अंदर से उसकी जान जा रही थी और उन दोनों ने ऐसे वीरान में गाड़ी रोकने को बोला जहां दूर-दूर तक केवल जंगल ही थे उसने डर के मारे उनसे कुछ भी नहीं पूछा । 
फिर औरत बोली बाबूजी हमको यहीं से धक्का देकर मारा गया था आरव बहुत ज्यादा डर गया वह बाइक स्टार्ट कर रहा था मगर डर के मारे उससे बाइक भी स्टार्ट नहीं हो रही थी ।

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डर के मारे उसके हाथ पैर कांप रहे थे कांप रहे थे पैर कांप रहे थे कांप रहे थे थे, वह तेजी से वहां से चल पड़ा लेकिन उसके दोस्त बहुत आगे पहुंच गए थे । वह वहां से जाने के बाद सीधा अपने घर गया।
घर पहुंचते ही वह डर से कांप रहा था उसकी आंखें लाल थी उन से आंसू बह रहे थे हाथ पैर कांप रहे थे वह घर के अंदर जाते ही अपने कमरे में गया, जैसे ही वह बिस्तर पर लेटा वह बेहोश हो गया जब वह सुबह उठा तो वह अपने बिस्तर पर लेटा था । तब से आज तक आरव कभी मसूरी नहीं गया ।

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