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Sudha Chandran Biography - सुधा चन्द्रन की प्रेणादायक कहानी |

मैं नाचूँगी ' सुधा चन्द्रन '

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सुधा चन्द्रन
सुधा नाचने की बड़ी शौकीन थी | जब वह 3 साल की थी, उसके पैर नाचने के लिए थिरकने लगे थे | वह रोज नाचने का अभ्यास किया करती थी | केवल 8 वर्ष की उम्र में उसने मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी | वह इतना सुंदर नाचती थी कि जो भी उसका नाच देखता बस देखता रह जाता |

धीरे-धीरे लोग उसे समारोहों में बुलाने लगे | जहाँ भी वह जाती, लोग उसका नाच देखने टूट पड़ते | रबर की तरह लचकता शरीर, बिजली की तरह थिरकते उसके पांव और चेहरे के बदलते भाव, सबको मंत्रमुग्ध कर देते | धीरे-धीरे देश भर में उसके कार्यक्रम होने लगे | अखबारों में उस पर लेख लिखे जाने लगे | सब जगह सुधा के नृत्य की चर्चा होने लगी |

तभी एक दिन बस दुर्घटना में उसका दायाँ पाँव खराब हो गया | डॉक्टरों की सलाह से उसका वह पाँव काट देना पड़ा | डॉक्टरों ने कहा, " बिना पाँव के अब यह लड़की कभी नाच नहीं सकेगी |" सुधा के चाहने वालों को बहुत दुख हुआ | उसके माता-पिता भी निराश हुए | वे सोचते,  अब उनकी बेटी कभी नाच नहीं सकेगी |

पर सुधा निराश नहीं हुई | वह तो किसी और मिट्टी की बनी थी | उसने मन ही मन ठान लिया | मैं नाचूँगी और जरूर नाचूँगी | असली पैर नहीं तो क्या ? मैं नकली पाँव लगाकर नाचूँगी | 


डॉक्टरों ने सुधा का नकली पैर लगा दिया | पहले उसने धीरे-धीरे उस पैर से चलना सीखा | फिर धीरे-धीरे नाचना | नाचते वक्त उसका कटा पैर दर्द करता,  सूज जाता और कभी-कभी उससे खून बहने लगता, वह दवाई लेती, और आराम करती और ठीक हो जाने पर नाचना शुरू कर देती | इस नकली पाँव के साथ नाचने का उसने महीनों तक अभ्यास किया |

फिर एक दिन वह स्टेज पर अपना नाच दिखाने उतरी | वह नाची | वही पहले जैसा ही लचक भरा तेज और सुंदर नाच | देखने वालों को अनुमान भी नहीं हुआ कि इतना सुंदर नृत्य करने वाली नर्तकी का एक पैर नकली है |

इस नृत्यांगना का पूरा नाम है -' सुधा चन्द्रन' | सुधा चन्द्रन अब भी नृत्य करती हैं | साथ ही फिल्मों और सीरियलों में अभिनय भी करती है |

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