Kabir Ke Dohe In Hindi : with meaning

कबीर दास के दोहे




⚫Kabir Das ke Dohe
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय ॥

Hindi Meaning  =
कबीरदास जी कहते हैं कि मेरे सामने गुरु और गोविंद ( भगवान )दोनों खड़े हैं। मैं पहले किसे प्रणाम करूं?
ऐसी स्थिति में कबीर अपने गुरु को प्राथमिकता देते हैं। क्योंकि गुरु की कृपा से ही उन्हें ईश्वर की प्राप्ति हुई है।

Kabir das ke dohe

⚫Kabir Das ke Dohe
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय |
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय ||

⚫ Hindi Meaning  =
कबीर दास जी कहते हैं कि दुःख के समय सभी भगवान् को याद करते हैं पर सुख में कोई नहीं करता।
यदि सुख में भी भगवान् को याद किया जाए तो दुःख हो ही क्यों !




⚫Kabir Das ke Dohe
पोथि पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोए |
ढाई आखर प्रेम के, पढ़ा सो पंडित होए ||

⚫ Hindi Meaning  =
बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए, पर सभी विद्वान न हो सके।
कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।


⚫Kabir Das ke Dohe
ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोए |
अपना तन शीतल करे, औरन को सुख होए ||
⚫ Hindi Meaning  =
कबीरदास जी कहते हैं कि हमें ऐसी भाषा बोलनी चाहिए।
जिससे सुनने वाले का मन भी प्रसन्न हो तथा हमारा मन भी प्रसन्न रहें। कबीर दास जी अपने इस दोहे से हमें यह सीख देना चाहते हैं कि हमें सदैव अच्छा अर्थात मीठा बोलना चाहिए। क्योंकि मीठा बोलने से सभी लोग खुश रहते हैं तथा किसी को दुख अर्थात पीड़ा नहीं पहुंचती है।




⚫Kabir Das ke Dohe
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब |
पल में परलय होएगी, बहुरी करोगे कब ||

⚫ Hindi Meaning  =
कबीर दास जी समय के महत्व को जानते हुए हमें अपने इस दोहे के माध्यम से यह बताते हैं। जो काम हमें कल करना है वह काम हमें आज कर लेना चाहिए और जो काम हमें आज करना है वह काम हमें अभी कर लेना चाहिए। क्योंकि समय का कोई भरोसा नहीं है कि कल क्या हो जाए आज यह जीवन है कल रहे या ना रहे।


⚫Kabir Das ke Dohe
साईं इतनी दीजिए, जा में कुटुंब समाए |
मैं भी भूखा न रहूं, साधू न भूखा जाए ||

⚫ Hindi Meaning  =
कबीर दास जी भगवान से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे प्रभु मुझे इतना दीजिए कि मेरा गुजारा चल जाए और अगर मेरे द्वार पर कोई आता है तो मैं तो भूखा ना रहूं और वह भी भूखा न जाए।




⚫Kabir Das ke Dohe
जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय ।
जैसा पानी पीजिये, तैसी बानी सोय ||

⚫ Hindi Meaning  =
कबीरदास जी कहते हैं कि हम जिस प्रकार का भोजन करते हैं। उसी प्रकार का हमारा मन अर्थात मस्तिष्क भी होता है। और हम जैसा पानी पीते हैं हमारी वाणी भी वैसी ही होती है।
इस दोहे के माध्यम से कबीर दास जी हमें यह बताते हैं कि संगती का हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए हमें सात्विक लोगों के साथ रहना चाहिए जिससे हमारा जीवन भी अच्छा होता है।

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