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कबीर के दोहे | कबीर का जीवन परिचय | Kabir Biography | kabir das dohe |

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कबीर का जीवन परिचय एवं उनके प्रमुख दोहे


कबीर दास भक्ति काल के सबसे महानतम कवियों में से एक थे | इनका जन्म 14वी -15वी शताब्दी के बीच काशी में हुआ था ऐसा माना जाता है और इनके गुरु का नाम स्वामी रामनंद था कबीर दास जी ज्ञानमार्गी कवि थे और इनकी कविताओं में रहस्यवाद झलकता है, गुरु स्वामी रामनंद ने उन्हें राम का भक्त होने का अद्वितीय वरदान दिया था लेकिन कबीर का दृष्टिकोण उस वक्त के अनुसार काफी अलग था क्योंकि भक्तिकाल में धार्मिक आडंबर अपने चरम पर था और कबीरदास जी इन सभी चीजों के विरुद्ध अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में फैली बुराइयों का विरोध व्यक्त किया करते थे एक तरफ तो कबीर राम भक्त थे लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने हिंदू धर्म की सभी प्रथाओं जैसे समाज में फैली बुराइयों, बाहरी दिखावे, आडंबर और पाखंड का विरोध किया वे व्रत, उपवास, मूर्ति पूजा को एक आडंबर मानते थे यही नहीं उन्होंने अजान, नमाज, हज, रोजा आदि की भी निंदा की क्योंकि कबीर ने ईश्वर को निराकार रूप में स्वीकारा था वह बाहरी दिखावे को मात्र एक आडंबर मानते थे |



कबीर की भाषा
कबीर दास की रचनाओं का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता ह…

Mirza ghalib ghazals in hindi | Ghazal |

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Mirza Ghalib Ghazal




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उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।
देखिए पाते हैं उशशाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बराह्मन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।
हमको मालूम है जन्नत की हक़ीकत लेकिन दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है।
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हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है? तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है?
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है?
चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन हमारी जेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है?
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा, कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है?
रही ना ताक़त-ए-गुफ़्तार और हो भी तो किस उम्मीद पे कहिए कि आरज़ू क्या है?
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दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द कि दवा क्या है।
हम हैं मुश्ताक और वो बेज़ार या इलाही ये माजरा क्या है।
मैं भी मुँह मे ज़बान रखता हूँ काश पूछो कि मुद्दा क्या है।
जब कि तुझ बिन नही कोई मौजूद फिर ये हंगामा ए खुदा क्या है।
हमको उनसे वफ़ा की है उम्मी…