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Love Shayari | शायरी मेरे प्यार की | प्यार की शायरी |

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🖤Love Shayari-शायरी मेरे प्यार की🖤

❤️Love Shayari
लोग पूछें, तू करे क्या
मैं क्या, मैं दर्द लिखूं
लोग पूछें, वो दर्द क्या
मैं क्या जो देखे ना, मैं वो लिखूं


log puchhen, tu kare kyaa
main kyaa, main dard likhun
log puchhen, vo dard kyaa
main kyaa jo dekhe naa, main vo likhun




💛Daar sa gya hoon
लगता है कि मैं मर सा गया हूँ
खोकर तुझे बिखर सा गया हूँ
पिरो तो  दूँ  किसी धागे में खुद को
मगर फिर बिखरने से डर सा गया हूँ

Lagataa hai ki main mar saa gayaa hoon
khokar tujhe bikhar saa gayaa hoon
piro to  doon  kisee dhaage men khud ko
magar fir bikharane se ḍaar saa gayaa hoon





💙Tere naam  देख लेना शब्दों की उन गलियों में मेरा भी नाम होगा
 शायरों की महफिल में तेरा आशिक भी बदनाम होगा
 दुनिया जब आशिकों को याद करेगी
 तो उनमें मेरा और तेरा भी नाम होगा

Dekh lenaa shabdon kee un galiyon men meraa bhee naam hogaa
 shaayaron kee mahafil men teraa aashik bhee badanaam hogaa
 duniyaa jab aashikon ko yaad karegee
 to unamen meraa aur teraa bhee naam hogaa



💜Meri aavaaj


 मुझे मेरी आवाज गूंजती सुनाई देती है
 खुद में भी तू  दिखाई द…

श्रीनिवास रामानुजन गणित का खिलाड़ी - प्रेरक प्रसंग

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गणित का खिलाड़ी 'श्रीनिवास रामानुजन'
"प्रेरक प्रसंग" तमिलनाडु के तन्जोेैर जिले में एक छोटा सा गाँव है- इरोड | यह घटना इसी गांव के प्राथमिक स्कूल की है | गुरुजी ने बच्चों से कहा,  " आधे घंटे में एक से सौ तक की सब संख्याओं का जोड़ निकाल कर मुझे दिखाओ |" सारे बच्चे सवाल हल करने में जुट गए |
10 मिनट भी नहीं बीते होंगे कि 7 वर्ष का एक बालक गुरुजी के सामने आकर खड़ा हो गया | उसने इतनी देर में 1 से 100 तक के अंको का जोड़ कर लिया था | गुरुजी उसकी उत्तर पुस्तिका देखकर दंग रह गए | उसने जोड़ बिल्कुल सही किया था | उस बच्चे ने सवाल हल करने में जिस सूत्र का प्रयोग किया था, उसे बड़ी कक्षाओं में पढ़ाया जाता था और बड़ी कक्षाओं के बच्चे ही सूत्र से सवाल हल कर सकते थे | मात्र 7 साल के इस नन्हे बच्चे की प्रतिभा देखकर गुरुजी चकित रह गए |
उन्होंने बच्चे से पूछा, "बेटा! तुमने यह सूत्र कहां से सीखा |" " किताब से पढ़कर |" बच्चा बोला |
यह यह बालक कोई और नहीं, भारत का महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन था | 7 साल की उम्र में गणित का चमत्कार दिखाने वाला …

प्रेरक प्रसंग - शैलेश मटियानी - प्रेरणादायक कहानी

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अब लिखूँगा प्रेरक प्रसंग - शैलेश हाई स्कूल में पढ़ते थे | अल्मोड़ा में उनके चाचा की मांस की दुकान थी | शैलेश पढ़ाई भी करतीे और चाचा के साथ दुकान पर भी बैठते थे | दुकान पर वह बकरे की खाल उतारते | मांस काटते और उसका कीमा बनाकर बेचते थे | इसके साथ-साथ शैलेश कविताएं और कहानियां भी लिखा करते थे |

उनकी दुकान पर तरह-तरह के लोग आया करते थे | कुछ दिनों बाद लोगों को पता चला कि शैलेश कविताएं और कहानियां भी लिखते हैं | 
एक दिन किसी आदमी ने शैलेश को सुनाते हुए कहा, "बच्चे! मांस तो तुम बढ़िया कूट लेते हो | इतनी ही बढ़िया कोई कविता बना कर दिखाओ तो जानें |"
शैलेश को यह बात चुभ गई | वह घर आए और घंटों सोचते रहे | उन्होंने निश्चय किया - मैं खूब कहानियां और कविताएं लिखूंगा | मुझे अब साहित्यकार बनना है, और कुछ नहीं | बालक शैलेश ने जीवन भर इस बात को निभाया |  बाद में वे हिंदी के महान साहित्यकार बने | जिन्हें साहित्य जगत में शैलेश मटियानी के नाम से जाना जाता है |

तिलाड़ी-कांड - विश्वम्भर दत्त चंदोला | Prerak Prasang |

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नाम नहीं बताऊँगा 'प्रेरक प्रसंग' 30 मई 1930 की बात है | रवाँई-जौनपुर के हजारों लोग तिलाड़ी के मैदान में एक सभा कर रहे थे | यह लोग राजा से जंगलों और गोेैचर भूमि पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे | राजा के सैनिकों ने बिना उनकी बात सुने, हजारों निहत्थे लोगों पर गोलियां चला दी | पूरा मैदान लाशों के ढेर में बदल गया | यह घटना ' तिलाड़ी-काण्ड' के नाम से जानी जाती है |
इस घटना का समाचार रवाँई निवासी किसी संवाददाता ने उस समय के समाचार पत्र 'गढ़वाली' मे प्रकाशित करा दिया | समाचार पढ़कर जनता में मानो भूचाल आ गया | राजा और उसके कर्मचारी घबरा गए | पूरी टिहरी रियासत हिल उठी |
"गढ़वाली" के संपादक विश्वंभर दत्त चंदोला थे | राजा ने चंदोला जी से कहा, " उस संवाददाता का नाम बताओ और इस घटना के लिए माफी मांगो |"

चंदोला जी ने कहा, " संवाददाता का नाम नहीं बताऊंगा |" उन्होंने माफी मांगने से भी इनकार कर दिया | इस घटना के लिए मजिस्ट्रेट ने उन्हें एक वर्ष की कैद की सजा सुना दी | चंदोला जी ने कैद सहर्ष स्वीकार कर ली पर अपने आदर्शों से डिगे नहीं | वह जब तक जीवित …

बद्री दत्त पाण्डेय - प्रेरक प्रसंग

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चलाओ गोली 'बद्री दत्त पाण्डेय' उत्तरायणी का मेला था | बागेश्वर में सरयू के किनारे एक विशाल मैदान में हजारों लोग जमा थे | यह लोग कुली बेगार, कुली उतार और बर्दायश जैसी कुप्रथाओं का विरोध करने के लिए एकत्र हुए थे | यह प्रथाएं अंग्रेजों ने अपने फायदे के लिए चलाई थी | अंग्रेज अफसर जब भी पहाड़ी गाँवों में आते, अपना सामान ढोने के लिए गांव वालों को पकड़ते और बिना कुछ दिए उनसे तरह-तरह के काम लेते | गांव वालों को अपने जरूरी काम छोड़कर अंग्रेजों की सेवा में लग जाना पड़ता था |
मेले के दिन हो रही इस सभा की खबर अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर डायबिल के पास पहुंची | डायबिल अपने कुछ सैनिकों को लेकर सभा स्थल पर पहुंचा | उसने मंच पर भाषण दे रहे व्यक्ति को तुरंत वहां से हट जाने को कहा | उसने आदेश दिया,  " तुरंत सभा भंग कर दो और यहां से हट जाओ |" मंच से भाषण दे रहे आदमी ने डायबिल का आदेश मानने से इनकार कर दिया | कमिश्नर आगबबूला हो गया | वह चिल्लाया,  " अगर सभा भंग नहीं हुई तो सब को गोलियों से भून दूंगा|"

मंच से भाषण दे रहा आदमी डरा नहीं | वह कड़कती आवाज में बोला, " चलाओ गोली | कित…

प्रेरक प्रसंग - Prerak Prasang

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वैदिक युग की वीरांगना 'प्रेरक प्रसंग' पुराने जमाने में एक राजा थे | वे खेलों के बड़े अच्छे जानकार थे | इस कारण वे खेल राजा के नाम से लोकप्रिय थे |
खेल राजा की रानी का नाम था ' विश्पला ' | विश्पला युद्ध कला में निपुण थी | उसकी वीरता की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी |
एक बार युद्ध में रानी विश्पला को शत्रुओं ने घेर लिया | रानी ने वीरता से शत्रुओं का मुकाबला किया | लेकिन लड़ते हुए रानी की दोनों पैर कट गए | इसके बावजूद विश्पला ने हार नहीं मानी और युद्ध करती रही |
रानी की वीरता देखकर खेल राजा बहुत प्रभावित हुए | उन्होंने अगस्त्य ऋषि से इस बात की चर्चा की | अगस्त्य ऋषि ने देवताओं के वैद्य अश्वनी कुमारों को बुलाया |
अश्विनी कुमारों ने रानी विश्पला के कटे पैरों की जगह लोहे के यांत्रिक पैर लगा दिए | रानी विश्पला ने फिर से शत्रुओं को ललकारा | वीरता से युद्ध लड़ा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त की |

आपको यह प्रेरक प्रसंग कैसा लगा हमें कमेंट में जरूर बताएं |

Sudha Chandran Biography - सुधा चन्द्रन की प्रेणादायक कहानी |

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मैं नाचूँगी ' सुधा चन्द्रन ' सुधा नाचने की बड़ी शौकीन थी | जब वह 3 साल की थी, उसके पैर नाचने के लिए थिरकने लगे थे | वह रोज नाचने का अभ्यास किया करती थी | केवल 8 वर्ष की उम्र में उसने मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी | वह इतना सुंदर नाचती थी कि जो भी उसका नाच देखता बस देखता रह जाता |
धीरे-धीरे लोग उसे समारोहों में बुलाने लगे | जहाँ भी वह जाती, लोग उसका नाच देखने टूट पड़ते | रबर की तरह लचकता शरीर, बिजली की तरह थिरकते उसके पांव और चेहरे के बदलते भाव, सबको मंत्रमुग्ध कर देते | धीरे-धीरे देश भर में उसके कार्यक्रम होने लगे | अखबारों में उस पर लेख लिखे जाने लगे | सब जगह सुधा के नृत्य की चर्चा होने लगी |

तभी एक दिन बस दुर्घटना में उसका दायाँ पाँव खराब हो गया | डॉक्टरों की सलाह से उसका वह पाँव काट देना पड़ा | डॉक्टरों ने कहा, " बिना पाँव के अब यह लड़की कभी नाच नहीं सकेगी |" सुधा के चाहने वालों को बहुत दुख हुआ | उसके माता-पिता भी निराश हुए | वे सोचते,  अब उनकी बेटी कभी नाच नहीं सकेगी |
पर सुधा निराश नहीं हुई | वह तो किसी और मिट्टी की बनी थी | उसने मन ही मन ठान लिया | मैं नाचूँगी …

Motivational Stories in Hindi for Students | स्वामी विवेकानन्द | प्रेरक प्रसंग |

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सच बोलूँगा "स्वामी विवेकानन्द" 'प्रेरक प्रसंग' कक्षा में गुरुजी कुछ पढ़ा रहे थे | नरेंद्र अपने दोस्तों से बात कर रहा था | उसी वक्त गुरुजी ने नरेंद्र से एक प्रश्न पूछा | नरेंद्र ने प्रश्न का सही जवाब दे दिया | गुरुजी ने वही सवाल नरेंद्र के दोस्तों से पूछा। नरेंद्र के साथी सही जवाब नहीं दे सके | अध्यापक ने उनको कान पकड़वाकर खड़ा कर दिया। तभी न जाने क्या हुआ। नरेंद्र भी अपने दोस्तों के साथ कान पकड़कर उनकी बगल में खड़ा हो गया।" तुम क्यों खड़े हो नरेंद्र ? मैंने तुम्हें तो कोई दंड नहीं दिया है।" गुरु जी ने नरेंद्र से पूछा | " मैंने अपना दंड स्वयं स्वीकार किया है |" नरेंद्र ने कहा। " ऐसा क्यों ? " गुरुजी ने फिर पूछा | " क्योंकि बातें मैं कर रहा था और मेरे दोस्त सुन रहे थे | " नरेंद्र ने जवाब दिया।
अध्यापक ने तुरंत नरेंद्र को अपने पास बुलाया। उसे शाबाशी दी। भी बोले,  " बच्चों नरेंद्र एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा। सारी दुनिया नरेंद्र को जानेगी | लोग इसके बताए मार्ग पर चलेंगे।"
गुरु जी की भविष्यवाणी सत्य साबित हुई | यही नरेंद्र …