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Friendship Shayari in Hindi - दोस्ती पर शायरियां

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Best Friendship Shayari and Quotes 


♕❣️💌मित्रता💌❣️♕ 

दुनियाँ के सभी रिश्ते ईश्वर बनाता है  मात्र मित्रता ही एक ऐसा रिश्ता है  जिसे हम खुद चुनते हैं 





♕मित्रता कमानी पड़ती है♕

मित्रता यूँ ही नहीं मिलती  कमानी पड़ती है  जो चीजें खुद को प्रिय होती हैं  गवाँनी पड़ती हैं  कभी खुद के तो कभी किसी के  हाथ पैर तुडवाने पड़ते हैं  मित्रता यूँ ही नहीं मिलती  कमानी पड़ती हैं 




♕😂मेरे प्यारे दोस्त 😂♕

मेरे प्यारे दोस्त  मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ  मगर जता नहीं पाता  इसीलिए  गालियों के माध्यम से  अपना प्यार  तुम तक पहुँचाता रहता हूँ 



🥺💙यूँ ना रुठा करो 💙🥺
देखो यारो  यूँ छोटी-छोटी बातों पे ना रुठा करो  अगर दोस्त मनाये तो मान जाया करो  किसी को तो झुकना होगा इस रिश्ते को  बचाने के लिए  अगर तुम्हें झुकना पड़े तो झुक जाया करो  यूँ छोटी-छोटी बातों पे ना रुठा करो 



🤝मित्रता हर दायरे से परे होती है 🤝
मित्रता भेदभाव से परे होती है  जातिभेद, रंगभेद, जीवभेद  मायने नहीं रखता  मित्रता सामाजिक और आर्थिक दायरे में  नहीं आती  मित्रता हर दायरे से परे होती है 

Breakup Shayari in Hindi - ब्रेकअप वाली शायरी

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Shayari For Breakup

❣️💌 तेरी ओर💌❣️

मैं कुछ और था कुछ और हो गया हूँ  तेरी ओर था  तुझसे दूर हो गया हूँ 


Breakup Quotes in Hindi

❣️💌 वाजिफ कहाँ💌❣️

ये वाजिफ कहाँ सनम के हम वफा करें और तुम यूँ दगा करो

Life Quotes for an Artist - Quotes for instagram Caption

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Artist Quotes 

The meaning of life for me, is  " neatly sketch your life, draw the lines perfectly, finish the drawing smoothly and feel the beauty silently.  That's called Art and I am the Artist of my Life."

Hindi Rap Lyrics - हिंदी रैप

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हिंदी रेप लिरिक्स
कैसे रोकूँ खुद को
मेरी वासनाए मुझ पे हावी
बन फकीर दुनिया से कट के बैठा  मैं लकीर का फकीर बन के बैठा
सपने बुन के ख्वाब मैं जगाए बैठा  धुंध मैं मचाये बैठा
मन का मैला बन के बैठा
खुद को सिर पे मैं चढ़ाए बैठा
लगता है कि युग बदल रहा है  कलयुग है मुझ पे हावी
देख के गरीब को
मैं खुद की राह बदल जो बैठा
लगता है कि युग बदल रहा है  कलयुग है मुझ पे हावी
लिखने बैठा शब्द जो छुपाए बैठा  लगता है कि मैं बदल रहा हूं
मेरी वासनाएं मुझ पे हावी
जो बदल रहा है जग को
हमने उसकी टांग खींची
लगता है कि
मैं नहीं ये जग बदल रहा है  क्योंकि कलयुग है हावी

- शायरी मेरे प्यार की


Chanakya Quotes Hindi - आचार्य चाणक्य के विचार

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ADVERTISEMENT Quotes by Chanakya

⦿ "आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान होता है।" ~ आचार्य चाणक्य



⦿ "बहुत से गुणो के होने के बाद भी सिर्फ एक दोष सब कुछ नष्ट कर सकता है."
~Chanakya



⦿ "आपसे दूर रह कर भी दूर नही है और वही जो आपके मन मे नही है वह आपके नजदीक रहकर भी दूर है."
~आचार्य चाणक्य


⦿ "दूसरों की गल्‍तियों से सीखो, अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्‍हारी आयु कम पड़ेगी"
~ चाण्‍क्‍य



⦿ "जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते हैं,जिसके मिलने की कोई उम्मीद ही ना हो, ऐसे लोग
मिली हुई चीज को भी खो देते हैं|"
~Chanakya

Love quotes for couples - Poetry of my Love

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ADVERTISEMENT Couples Love Quotes Deep Meaning 
Throb says  the heart  doesn't beat  without you

Mother's Day Hindi Quotes - मातृ दिवस

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Mother's Day Shayari Status 
होगा ना शब्दों में बयां मुझसे इतना कर्ज है माँ,  तेरा मुझपे जनम भर भी तेरी सेवा करूँ तो  कम होगा, माँ है इतना तेरा करम मुझपे

Army quotes in hindi - आर्मी शायरी

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ADVERTISEMENT Indian Army Quotes and Shayari

सपना जो इन आँखों ने पाला है  उसे जीना तो पड़ेगा  और अगर उसे जीना है  तो उसके लिए मरना तो पड़ेगा 

Lord Krishna Moral Quotes Shayari

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ADVERTISEMENT Krishna Shayari 
है जिंदगी का साज तू हर खुशी का राज तू  मैं सही तो तू भी खुश है  मैं गलत, नाराज तू

जिस्म वाली शायरी - shayari urdu in hindi

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ADVERTISEMENT  शायरी उर्दू इन हिंदी
हजार जिस्मों को छू के भी यादें  बस उस एक शख्स की ही  रह जाती है 

Life Quotes in Hindi - शायरी मेरे प्यार की

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ये इश्क बीमारी
होती ही ऐसी है
शिद्धत से करो  तो बेज्जती मिलेगी,
बेज्जती करो तो
सिद्धत तुम्हारी ।

Kadam Kadam Badhaye Ja

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क़दम-क़दम बढ़ाये जा ख़ुशी के गीत गाये जा ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटाये जा क़दम-क़दम बढ़ाये जा ख़ुशी के गीत गाये जा ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटाये जा तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़ मरने से फिर भी तू न डर उड़ा के दुश्मनों का सर जोश-ए-वतन बढ़ाये जा तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़ मरने से फिर भी तू न डर उड़ा के दुश्मनों का सर जोश-ए-वतन बढ़ाये जा क़दम-क़दम बढ़ाये जा ख़ुशी के गीत गाये जा ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटाये जा चलो दिल्ली पुकार के क़ौमी-निशाँ संभाल के लाल क़िले पे गाड़ के लहराये जा, लहराये जा चलो दिल्ली पुकार के क़ौमी-निशाँ संभाल के लाल क़िले पे गाड़ के लहराये जा, लहराये जा क़दम-क़दम बढ़ाये जा ख़ुशी के गीत गाये जा ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटाये जा क़दम-क़दम बढ़ाये जा ख़ुशी के गीत गाये जा ये ज़िंदगी है क़ौम की तू क़ौम पे लुटाये जा

Horror Story In Hindi - सच्ची घटना पर आधारित हॉरर स्टोरी

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मसूरी की डरावनी रात -  सच्ची डरावनी कहानी

यह कहानी आरव की है और है और उसकी जिंदगी में घटी एक सच्ची घटना पर आधारित है। दिन के समय डर शायद ही किसी को लगता होगा मगर वीरान जंगल में सच्चाई कुछ और होती है। डर का एहसास हमें अकेले में होता है। बात देहरादून की है आरव अपने दोस्तों के साथ जॉर्ज एवरेस्ट घूमने गया था, वे अक्सर कहीं बाहर घूमने जाया करते थे , और उस दिन अमित का जन्मदिन था इसलिए आरव और उसके दोस्त अमित का जन्मदिन मनाने के लिए मसूरी गए थे ।  आते हुए शाम बहुत ज्यादा हो चुकी थी मगर कोई आने को तैयार न था सभी नशे में थे सभी ने पी रखी थी, आरव ने केवल बियर पी थी । जब वह वहां से देहरादून के लिए निकले तो रात के 10:00 बज गए थे और आरव की बाइक पर कोई नहीं बैठा था वह अकेला था । जब दोस्त निकले वह पेशाब करने में लग गया क्योंकि उसने ज्यादा बीयर पी रखी थी, दोस्त एक मोड़ आगे निकल गए  थे, वे हल्ला कर रहे थे और स्पीकर पर जोरो से गाने बजा रहे थे । किसी को होश तो था नहीं सारे नशे में थे, और आरव जब चलने लगा तो उसे लगा उसके पीछे कोई है उसने पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई भी नहीं था, उसने जल्दी स…

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ हनुमान चालीसा हिंदी में ।

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Hanuman Chalisa Lyrics In Hindi

दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। 
चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥ हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥ शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥ विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥ लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥ तुम उपकार सुग्रीवहि …

श्रीनिवास रामानुजन गणित का खिलाड़ी - प्रेरक प्रसंग

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गणित का खिलाड़ी 'श्रीनिवास रामानुजन'
"प्रेरक प्रसंग" तमिलनाडु के तन्जोेैर जिले में एक छोटा सा गाँव है- इरोड | यह घटना इसी गांव के प्राथमिक स्कूल की है | गुरुजी ने बच्चों से कहा,  " आधे घंटे में एक से सौ तक की सब संख्याओं का जोड़ निकाल कर मुझे दिखाओ |" सारे बच्चे सवाल हल करने में जुट गए |
10 मिनट भी नहीं बीते होंगे कि 7 वर्ष का एक बालक गुरुजी के सामने आकर खड़ा हो गया | उसने इतनी देर में 1 से 100 तक के अंको का जोड़ कर लिया था | गुरुजी उसकी उत्तर पुस्तिका देखकर दंग रह गए | उसने जोड़ बिल्कुल सही किया था | उस बच्चे ने सवाल हल करने में जिस सूत्र का प्रयोग किया था, उसे बड़ी कक्षाओं में पढ़ाया जाता था और बड़ी कक्षाओं के बच्चे ही सूत्र से सवाल हल कर सकते थे | मात्र 7 साल के इस नन्हे बच्चे की प्रतिभा देखकर गुरुजी चकित रह गए |
उन्होंने बच्चे से पूछा, "बेटा! तुमने यह सूत्र कहां से सीखा |" " किताब से पढ़कर |" बच्चा बोला |
यह यह बालक कोई और नहीं, भारत का महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन था | 7 साल की उम्र में गणित का चमत्कार दिखाने वाला …

प्रेरक प्रसंग - शैलेश मटियानी - प्रेरणादायक कहानी

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अब लिखूँगा प्रेरक प्रसंग - शैलेश हाई स्कूल में पढ़ते थे | अल्मोड़ा में उनके चाचा की मांस की दुकान थी | शैलेश पढ़ाई भी करतीे और चाचा के साथ दुकान पर भी बैठते थे | दुकान पर वह बकरे की खाल उतारते | मांस काटते और उसका कीमा बनाकर बेचते थे | इसके साथ-साथ शैलेश कविताएं और कहानियां भी लिखा करते थे |

उनकी दुकान पर तरह-तरह के लोग आया करते थे | कुछ दिनों बाद लोगों को पता चला कि शैलेश कविताएं और कहानियां भी लिखते हैं | 
एक दिन किसी आदमी ने शैलेश को सुनाते हुए कहा, "बच्चे! मांस तो तुम बढ़िया कूट लेते हो | इतनी ही बढ़िया कोई कविता बना कर दिखाओ तो जानें |"
शैलेश को यह बात चुभ गई | वह घर आए और घंटों सोचते रहे | उन्होंने निश्चय किया - मैं खूब कहानियां और कविताएं लिखूंगा | मुझे अब साहित्यकार बनना है, और कुछ नहीं | बालक शैलेश ने जीवन भर इस बात को निभाया |  बाद में वे हिंदी के महान साहित्यकार बने | जिन्हें साहित्य जगत में शैलेश मटियानी के नाम से जाना जाता है |

तिलाड़ी-कांड - विश्वम्भर दत्त चंदोला | Prerak Prasang |

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नाम नहीं बताऊँगा 'प्रेरक प्रसंग' 30 मई 1930 की बात है | रवाँई-जौनपुर के हजारों लोग तिलाड़ी के मैदान में एक सभा कर रहे थे | यह लोग राजा से जंगलों और गोेैचर भूमि पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे | राजा के सैनिकों ने बिना उनकी बात सुने, हजारों निहत्थे लोगों पर गोलियां चला दी | पूरा मैदान लाशों के ढेर में बदल गया | यह घटना ' तिलाड़ी-काण्ड' के नाम से जानी जाती है |
इस घटना का समाचार रवाँई निवासी किसी संवाददाता ने उस समय के समाचार पत्र 'गढ़वाली' मे प्रकाशित करा दिया | समाचार पढ़कर जनता में मानो भूचाल आ गया | राजा और उसके कर्मचारी घबरा गए | पूरी टिहरी रियासत हिल उठी |
"गढ़वाली" के संपादक विश्वंभर दत्त चंदोला थे | राजा ने चंदोला जी से कहा, " उस संवाददाता का नाम बताओ और इस घटना के लिए माफी मांगो |"

चंदोला जी ने कहा, " संवाददाता का नाम नहीं बताऊंगा |" उन्होंने माफी मांगने से भी इनकार कर दिया | इस घटना के लिए मजिस्ट्रेट ने उन्हें एक वर्ष की कैद की सजा सुना दी | चंदोला जी ने कैद सहर्ष स्वीकार कर ली पर अपने आदर्शों से डिगे नहीं | वह जब तक जीवित …

बद्री दत्त पाण्डेय - प्रेरक प्रसंग

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चलाओ गोली 'बद्री दत्त पाण्डेय' उत्तरायणी का मेला था | बागेश्वर में सरयू के किनारे एक विशाल मैदान में हजारों लोग जमा थे | यह लोग कुली बेगार, कुली उतार और बर्दायश जैसी कुप्रथाओं का विरोध करने के लिए एकत्र हुए थे | यह प्रथाएं अंग्रेजों ने अपने फायदे के लिए चलाई थी | अंग्रेज अफसर जब भी पहाड़ी गाँवों में आते, अपना सामान ढोने के लिए गांव वालों को पकड़ते और बिना कुछ दिए उनसे तरह-तरह के काम लेते | गांव वालों को अपने जरूरी काम छोड़कर अंग्रेजों की सेवा में लग जाना पड़ता था |
मेले के दिन हो रही इस सभा की खबर अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर डायबिल के पास पहुंची | डायबिल अपने कुछ सैनिकों को लेकर सभा स्थल पर पहुंचा | उसने मंच पर भाषण दे रहे व्यक्ति को तुरंत वहां से हट जाने को कहा | उसने आदेश दिया,  " तुरंत सभा भंग कर दो और यहां से हट जाओ |" मंच से भाषण दे रहे आदमी ने डायबिल का आदेश मानने से इनकार कर दिया | कमिश्नर आगबबूला हो गया | वह चिल्लाया,  " अगर सभा भंग नहीं हुई तो सब को गोलियों से भून दूंगा|"

मंच से भाषण दे रहा आदमी डरा नहीं | वह कड़कती आवाज में बोला, " चलाओ गोली | कित…

प्रेरक प्रसंग - Prerak Prasang

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वैदिक युग की वीरांगना 'प्रेरक प्रसंग' पुराने जमाने में एक राजा थे | वे खेलों के बड़े अच्छे जानकार थे | इस कारण वे खेल राजा के नाम से लोकप्रिय थे |
खेल राजा की रानी का नाम था ' विश्पला ' | विश्पला युद्ध कला में निपुण थी | उसकी वीरता की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी |
एक बार युद्ध में रानी विश्पला को शत्रुओं ने घेर लिया | रानी ने वीरता से शत्रुओं का मुकाबला किया | लेकिन लड़ते हुए रानी की दोनों पैर कट गए | इसके बावजूद विश्पला ने हार नहीं मानी और युद्ध करती रही |
रानी की वीरता देखकर खेल राजा बहुत प्रभावित हुए | उन्होंने अगस्त्य ऋषि से इस बात की चर्चा की | अगस्त्य ऋषि ने देवताओं के वैद्य अश्वनी कुमारों को बुलाया |
अश्विनी कुमारों ने रानी विश्पला के कटे पैरों की जगह लोहे के यांत्रिक पैर लगा दिए | रानी विश्पला ने फिर से शत्रुओं को ललकारा | वीरता से युद्ध लड़ा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त की |

आपको यह प्रेरक प्रसंग कैसा लगा हमें कमेंट में जरूर बताएं |

Sudha Chandran Biography - सुधा चन्द्रन की प्रेणादायक कहानी |

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मैं नाचूँगी ' सुधा चन्द्रन ' सुधा नाचने की बड़ी शौकीन थी | जब वह 3 साल की थी, उसके पैर नाचने के लिए थिरकने लगे थे | वह रोज नाचने का अभ्यास किया करती थी | केवल 8 वर्ष की उम्र में उसने मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी | वह इतना सुंदर नाचती थी कि जो भी उसका नाच देखता बस देखता रह जाता |
धीरे-धीरे लोग उसे समारोहों में बुलाने लगे | जहाँ भी वह जाती, लोग उसका नाच देखने टूट पड़ते | रबर की तरह लचकता शरीर, बिजली की तरह थिरकते उसके पांव और चेहरे के बदलते भाव, सबको मंत्रमुग्ध कर देते | धीरे-धीरे देश भर में उसके कार्यक्रम होने लगे | अखबारों में उस पर लेख लिखे जाने लगे | सब जगह सुधा के नृत्य की चर्चा होने लगी |

तभी एक दिन बस दुर्घटना में उसका दायाँ पाँव खराब हो गया | डॉक्टरों की सलाह से उसका वह पाँव काट देना पड़ा | डॉक्टरों ने कहा, " बिना पाँव के अब यह लड़की कभी नाच नहीं सकेगी |" सुधा के चाहने वालों को बहुत दुख हुआ | उसके माता-पिता भी निराश हुए | वे सोचते,  अब उनकी बेटी कभी नाच नहीं सकेगी |
पर सुधा निराश नहीं हुई | वह तो किसी और मिट्टी की बनी थी | उसने मन ही मन ठान लिया | मैं नाचूँगी …

Motivational Stories in Hindi for Students | स्वामी विवेकानन्द | प्रेरक प्रसंग |

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सच बोलूँगा "स्वामी विवेकानन्द" 'प्रेरक प्रसंग' कक्षा में गुरुजी कुछ पढ़ा रहे थे | नरेंद्र अपने दोस्तों से बात कर रहा था | उसी वक्त गुरुजी ने नरेंद्र से एक प्रश्न पूछा | नरेंद्र ने प्रश्न का सही जवाब दे दिया | गुरुजी ने वही सवाल नरेंद्र के दोस्तों से पूछा। नरेंद्र के साथी सही जवाब नहीं दे सके | अध्यापक ने उनको कान पकड़वाकर खड़ा कर दिया। तभी न जाने क्या हुआ। नरेंद्र भी अपने दोस्तों के साथ कान पकड़कर उनकी बगल में खड़ा हो गया।" तुम क्यों खड़े हो नरेंद्र ? मैंने तुम्हें तो कोई दंड नहीं दिया है।" गुरु जी ने नरेंद्र से पूछा | " मैंने अपना दंड स्वयं स्वीकार किया है |" नरेंद्र ने कहा। " ऐसा क्यों ? " गुरुजी ने फिर पूछा | " क्योंकि बातें मैं कर रहा था और मेरे दोस्त सुन रहे थे | " नरेंद्र ने जवाब दिया।
अध्यापक ने तुरंत नरेंद्र को अपने पास बुलाया। उसे शाबाशी दी। भी बोले,  " बच्चों नरेंद्र एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा। सारी दुनिया नरेंद्र को जानेगी | लोग इसके बताए मार्ग पर चलेंगे।"
गुरु जी की भविष्यवाणी सत्य साबित हुई | यही नरेंद्र …

तीलू रौतेली के प्रेरक प्रसंग | Teelu Rauteli Motivational Story In Hindi

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वीरबाला 'तीलू रौतेली' वह गुराड़  की थोकदार की बेटी थी | उसकी दो सहेलियाँ थी 'देवकी और बेलू । वह बचपन से ही अपनी सहेलियों के साथ बहादुरी के खेल खेला करती थी | कुश्ती,  घुड़सवारी और तलवार चलाने का उसे अच्छा अभ्यास हो गया था |
एक बार उसके इलाके पर शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया | सैनिक वीरता पूर्वक लड़े लेकिन इलाके की रक्षा करते हुए उसके पिता भूपसिंह गोला और भाई भगतू तथा पतवा शहीद हो गए | वह स्वाभिमानी बालिका थी | पिता और भाइयों के बलिदान के बाद भी उसने शत्रु के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया | उसने पुरुष वेश धारण किया | अपनी बची-खुची बिखरी सेना को संगठित किया और फिर से शत्रुओं को ललकारने निकल पड़ी | उस वक्त उसकी उम्र मात्र 15 वर्ष थी | 
वह लगातार 7 वर्ष तक आक्रमणकारियों से जूझती रही आखिर उसने दुश्मनों को राज्य से बाहर खदेड़ कर ही दम लिया |
शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर एक दिन जब वह वापस अपने गांव लौट रही थी, एक स्थान पर एकांत पाकर वह नदी में स्नान करने उतरी | तभी किसी शत्रु सैनिक ने उसे देख लिया और पीछे से वार कर धोके से मार डाला | यह वीरांगना इतिहास में वीरबाला तीलू रौतेली के नाम से …

Prerak Prasang | Begum Hazrat Mahal | प्रेरक प्रसंग

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हिंदुस्तानी रिवाज
"Prerak Prasang" घटना सन 1857 की है | स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों ने लखनऊ के क्रांतिकारियों से मिलकर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे | कई अंग्रेज अधिकारी और सैनिक बंदी बना लिए गए | बेगम हजरत महल स्वयं घोड़े पर बैठकर इन क्रांतिकारियों का नेतृत्व कर रही थी | आधी रात हो गई थी | बेगम हजरत अभी भी जाग रही थी | चारों तरफ मारो-काटो के स्वर गूंज रहे थे | तभी क्रांतिकारियों के सरदार दलपत सिंह महल में पहुंचे | वे बेगम से बोले बेगम हुजूर आपको एक सलाह देने आया हूँ |" "वह क्या? " बेगम ने पूछा |
"आप कैदी फिरंगियों को मुझे सौंप दीजिए | मैं एक- एक के हाथ पैर काट कर अंग्रेजों की छावनियों में भेजूँगा | " बात करते-करते दलपत सिंह का चेहरा घृणा से भर उठा |
"नहीं,  हरगिज़ नहीं!" बेगम के लहजे में कठोरता आ गई | " हम कैदियों के साथ ऐसा व्यवहार न तो खुद कर सकते हैं और ना किसी को इसकी इजाजत दे सकते हैं | कैदियों पर जुल्म ढाने का रिवाज हमारे हिंदुस्तान में नहीं है | युद्ध अपनी जगह है | वह अपने तरीके से लड़ा जाएगा | लेकिन हमारे जीते जी फिरंगी क…